याद रखो, यदि जीत को पाना आपका जन्मसिद्ध अधिकार है तो जीतना भी आपको ही होगा। कोई दूसरा जीत को आपके सामने परोसने नहीं आएगा और कोई आपके इस मौलिक अधिकार को छीन भी नहीं सकता। अब जीत के इस अधिकार का उपयोग और इसकी रक्षा आपको स्वयं ही करनी होगी। यदि आप इसमें असफल रहते हैं तो दूसरे आपसे बाजी मार ले जाएंगे। यदि मंजिल तक पहुंचना है तो प्लेटफार्म पर खड़े रहने से ही काम नहीं चलेगा, वाहन में तो चढ़ना ही होगा। जो चढ़ेगा वही सफर तय करेगा और वही मंजिल तक पहुंचेगा।